पौराणिक कथाएं। चारो युगों में सबसे महान युग कोनसा है? कलियुग सबसे महान क्यों?

 पौराणिक कथाएं। चारो युगों में सबसे महान युग कोनसा है? कलियुग सबसे महान क्यों?

पौराणिक कथाएं। चारो युगों में सबसे महान युग कोनसा है? कलियुग सबसे महान क्यों?

पौराणिक कथाएं। चारो युगों में सबसे महान युग कोनसा है? कलियुग सबसे महान क्यों?


प्रिय पाठकों आप सभी का एक बार फिर से हमारे ब्लॉग Allhindistory पर तेहदिल से स्वागत है। प्रिय पाठकों वैसे हमारे सनातन हिंदू धर्म में अभी तक तीन युग ( सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग ) बीत गए गए है। और चौथा युग ( कलियुग ) अभी वर्तमान में चालू है। 

अब दोस्तो बात यह पर आकर अटक जाती है की, इन चार युगों में सबसे बड़ा या महान कौन है। हम कोनसे युग को सबसे महान माने? तो दोस्तो इसी बात को लेकर एक बार चारो युगों में भी बहस चिढ़ गई की हम चारो में महान कोन है। और बात इतनी बढ़ गई की कोई भी देवता इसका फैसला नही कर पाया की इन चारो में महान कौन है। 

फिर सभी देवताओं ने मिलकर चारो युगों को कैलाश पर्वत पर विराजमान आदि, अनादि, अजर, अमर, अविनाशी भगवान शंकर के पर जाने की सलाह दी की आप चारो की लड़ाई का फैसला तो भगवान भोलेनाथ ही कर सकते है। फिर चारो भाई देवताओं की बात मानकर कैलाश पर्वत की और प्रस्थान करते है।
 
तो प्रिय पाठको भगवान शंकर एवम मैया पार्वती ने कैसे उन चारो भाईयो की समस्या का समाधान किया? और भोलेनाथ उन चारो युगों की कैसे परीक्षा लेते है? और कौन सा युग होगा सबसे महान? ये सब जानने के लिए पढ़िए ये पौराणिक कथा 👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻 


अस्वीकरण:- इस Allhindistory ब्लाग पर लिखित सभी कथाएं एवं रचनाएं इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी से ही लिखी गई है। एवं इस ब्लॉक पर लिखित सभी पौराणिक कहानी या रचनाओ के सही या गलत होने का दावा Allhindistory ब्लॉग के एडमिन या हमारी टीम का कोई भी सदस्य नही करता है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


एक समय की बात है। सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग ये चारो युग यानी चारों भाई एक साथ बैठे हुए थे तब आपस में चारों में वाद विवाद होने लगता है। सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलियुग चारों एक साथ बैठे हुए विवादों में उलझने लगे सबसे पहले सतयुग कहने लगा की अरे मूर्खो तुम सब मुझसे छोटे हो, तुम मेरी बराबरी कैसे करने लगे जब त्रेता युग ने यह बात सुनी तब वो कहने लगा की ही सतयुग तुम सबसे बड़े कैसे हो सकते हो तुम सब से सबसे बड़ा तो मैं हूं मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं तुम मुझसे सर्वश्रेष्ठ नहीं हो सकते तब द्वापर युग बोल उठा की ही त्रेतायुग तुम सर्वश्रेष्ठ कैसे हो सकते हो तुम सभी में श्रेष्ठ तो मैं हूं तुम्हारा श्रेष्ठ होने का तो सवाल ही नहीं उठाता, अब तक सब कुछ सुन रहा कलयुग कहने लगा की तुम तीनों ही श्रेष्ठ बन रहे हो परंतु हकीकत तो जानते ही नहीं वास्तविकता तो यह है की मैं ही सर्वश्रेष्ठ हूं।

इस तरह से चारों युग आपस में झगड़ने लगे और बात इतनी बढ़ गई की कोई भी देवता इसका फैसला नही कर पाया की इन चारो में महान कौन है। फिर सभी देवताओं ने मिलकर चारो युगों को कैलाश पर्वत पर विराजमान आदि, अनादि, अजर, अमर, अविनाशी भगवान शंकर के पर जाने की सलाह दी की आप चारो की लड़ाई का फैसला तो भगवान भोलेनाथ ही कर सकते है। क्युकी भोलेनाथ ही आदि और अनंत है चलिए उन्ही के पास कैलाश पर जाओ हैं वहीं आपको बताएंगे की तुम चारों में कौन बड़ा है और कौन छोटा है इसका निर्णय स्वयं भगवान शंकर करेंगे इसका निर्णय हम नहीं कर सकते फिर चारो भाई देवताओं की बात मानकर कैलाश पर्वत की और प्रस्थान करते है। 

वह कैलाश पर्वत पर पहुंचने हैं तो भोलेनाथ के द्वारपाल उन्हें द्वार पर रोक लेते हैं द्वारपाल कहते हैं की, तुम चारों कौन हो और कहां जा रहे हो तब चारों युग कहने लगते है की हे द्वारपाल हम भगवान शिव से मिलना चाहते हैं उन्हें हमारे आने की सूचना दी जाए। तभी स्वयं नंदीश्वर ( द्वारपाल ) महाराज भगवान शिव के पास आए और भगवान शिव से कहने लगे की प्रभु हे कैलाशपति आपसे चारों युग मिलना चाहते हैं भगवान शिव कहते हैं की जाओ उन चारों को सम्मान सहित हमारे समक्ष ले आओ तभी नंदीश्वर चारों युगों को लेकर पहुंच जाते हैं भगवान शिव के पास, भगवान शिव ने चारों को सम्मान सहित अपने दरबार में बैठाया, चारों युग भगवान शिव को प्रणाम करते हैं तब भगवान शिव ने चारों युगों से कहा की आप सभी का हमारे दरबार में हमारे कैलाश पर्वत पर स्वागत है कहो तुम्हारे आने का क्या प्रयोजन है तुम तो स्वयं ही कालचक्र हो तुम तो स्वयं ही समय हो फिर ऐसा क्या करण है की तुम्हें भी हमारे पास आना पड़ा।
 
चारों युग कहते हैं की, हे सृष्टि के रचयिता है भगवान शिव हम चारों में विवाद खड़ा हो गया है और हम उसी विवाद का समाधान नहीं कर पा रहे है। इसीलिए हम आपके पास आए हैं अब हम आपसे निवेदन करते हैं और गुहार करते हैं की है भगवान आप ही हमारा फैसला करेंआप हमारा न्याय करें और हमें बताएं की हम चारों में सबसे बड़ा कौन है? हम चारों में सर्वश्रेष्ठ कौन हैं? 

भगवान शिव कहते हैं की, इसका फैसला तो तब होगा जब आप चारों अपना अपना फैसला मुझे सुनाएंगे तब भगवान शिव सतयुग से कहते हैं की, हे सतयुग तुम बताओ की तुम कैसे सबसे बड़े हो तुम अपने आप को कैसे सर्वश्रेष्ठ बता रहे हो, तब सतयुग भगवान शिव से कहता है की देखिए प्रभु मेरी आयु सबसे ज्यादा है मैं एक लाख वर्ष का हूं और अन्य युग मुझसे तो बहुत छोटे हैं इसीलिए मैं इन सभी से लंबी आयु का हूं तब तक कलयुग बोल उठा कहने लगा की है प्रभु मैंने तो यही सुना है की व्यक्ति कभी आयु से बड़ा नहीं होता व्यक्ति तो अपने कर्मो से बड़ा होता है भगवान शिव ने कलयुग की दलील को माना और सतयुग से कहा की सतयुग तुम इस तरह तो बड़े नहीं हो सकते।

सतयुग कहने लगा की, हे प्रभु मेरे युग में जो व्यक्ति हुए वह बड़े ही बलवान हुए बड़े ही पराक्रमी हुए वे पृथ्वी तक को उठा ले जाने की क्षमता रखते थे ऐसे पराक्रमी और बलवान योद्धा थे और मेरे राज में।स्वयं भगवान श्री हरि विष्णु ने कई अवतार लिए देखिए प्रभु नृसिंह अवतार मेरे ही काल में हुआ वराह अवतार मेरे ही काल में हुआ मत्स्य अवतार मेरे ही शासनकाल में हुआ। 

तब तक त्रेता युग भी बोल उठा नहीं प्रभु श्री हरि विष्णु के अवतार होने से सतयुग बड़े नहीं हो सकते हैं प्रभु अवतार तो मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम का अवतार भी मेरे काल में भी हुआ था। जिन्होंने संसार को मर्यादा का पाठ सिखाया और अगर आप बलवान योद्धा की बात करते हो तो कुंभकरण जैसे योद्धा राम रावण जैसे योद्धा मेरे शासनकाल में भी हुए है प्रभु इस तरह से सतयुग बड़ा नहीं हो सकता तो फिर इन सब में बड़ा तो मैं हूं🤔🤔

जब यह बात द्वापर युग ने सुनी तो द्वापर युग कहने लगा की है प्रभु दोनों बड़े बन रहे हैं परंतु यह दोनों बड़े कैसे हो सकते
हैं देखिए प्रभु आप जानते हैं की जब मेरा शासनकाल आया तो मेरे काल में तो भगवान श्री कृष्णा जैसे अवतार पैदा हुए जो की कलाओं से संपूर्ण पर ब्रह्म परमेश्वर थे जिन्होंने विराट रूप दिखाए वैसा विराट रूप तो साक्षात भगवान विष्णु भी नहीं दिखा सकते है भगवान अगर योद्धाओं की बात करते हैं तो मेरे शासनकाल में बड़े-बड़े योद्धा जेसे कर्ण, एकलव्य, गुरुद्रोण, कृपाचार्य, जरासंध, भीष्मपितामह, अश्वत्थामा, और अर्जुन, भीम, युधिष्ठिर, नकुल,सहदेव, अभिमन्यु, घटोत्च्व, बर्बरीक आदि मेरे ही शासन काल में हुए थे प्रभु बलराम स्वयं मेरे ही शासनकाल में हुए थे, तो बताइए प्रभु की मेरे शासनकाल में कौनसा योद्धा इनके योद्धाओं से कम था है प्रभु इन सब में तो मैं बड़ा हूं तब तक।

तभी तीनों युग बोले कि केसे मान ले कलियुग को बड़ा। इनके शासनकाल में जो भी योद्धा हुए जो भी अवतार हुए उनमें कई कमजोरी पाई गई थी और जिनके शासनकाल में कमजोरी वाले मनुष्य हो वो सर्वश्रेष्ठ कैसे हो सकता है। कलयुग कहने लगा की नहीं भगवान मेरा शासनकाल सबसे अच्छा है, मेरे युग में व्यक्ति के भोग विलास के लिए कई सुविधा हैं अच्छे अच्छे और नई नई तकनीक से परिपूर्ण मेरा युग मेरा शासनकाल सभी में सर्वश्रेष्ठ है।
 
जब भगवान शिव ने चारों युग सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग की वाणी सुनी चारों के उत्तर सुने चारों की बहस सुनी तो भगवान शिव अपने मन में विचार करने लगे और चोसने लगे की इनका फैसला कैसे किया जाए पास में ही माता पार्वती बैठी थी माता पार्वती कहती है की हे प्रभु अगर आप ही इनका फैसला नहीं कर पाएतो फिर इनका फैसला कौन करेगा फिर तो चारों भाई आपस में ही मर जाएंगे, हे महादेव इसीलिए आप ही इनका फैसला कीजिए सभी देवता मिलकर भगवान शिव से कहने लगे की हे भोलेनाथ आप ही इनका फैसला करें नहीं तो चारों युग अगर आपस में लड़ने लगे तो फिर क्या होगा सृष्टि का कालचक्र ही रुक जाएगा।

समय का प्रवाह रुक जाएगा भोलेनाथ आप ही कुछ कीजिए भगवान शिव कहते हैं की ठीक है मैं समस्त गणों की बात मानता हूं मैं इन चारों युगों का फैसला करूंगा भगवान शिव ने चारों युगों से कहा की चलो ठीक है। मैं तुम चारों की परीक्षा लूंगा और जो परीक्षा में सफल हुआ वहीं सबसे बड़ा होगा, सतयुग बोल उठा की है भगवान आप जो चाहे वह परीक्षा ले लीजिए लेकिन सबसे बड़ा तो मैं ही रहूंगा, कलयुग कहता है हे प्रभु हम सब भी परीक्षा देने के लिए तैयार है आप तो बस परीक्षा लीजिए चारों युग परीक्षा देने के लिए तैयार हो जाते हैं।

भगवान शिव ने एक सो टन वजन की एक लोहे की कड़ाही लिया और कैलाश पर्वत के नीचे एक तलहटी में रख दिया और उस कड़ाही के पास में ही एक चावल का ढेर लगा दिया भगवान शिव ने चारों युगों को बुलाया और कहा की तुम चारों की परीक्षा अभी हो जाएगी भगवान शिव सतयुग से कहते हैं की हे सतयुग मेरे सभी गण यहां बैठे हैं और तुम अपने बल से इस सो टन वजनी कड़ाही को भट्टी पर रखो और पास में जो चावल का ढेर पड़ा है उसी ढेर को इस कढ़ाई में पकाओ और मेरे सभी गानों को भोजन कराओ। 

भगवान शिव कहते हैं की हे सतयुग तुम तुम्हारे युग का कोई भी व्यक्ति बुलाओ और उसे भोजन बनाने के लिए भेज दो हम सभी लोग यहां खड़े होकर देख रहे हैं जब भगवान शिव की बात सतयुग ने सुनी तो एक बहुत बड़ा बलवान योद्धा सतयुग ने बुलाया और कहा की जाओ वत्स इस कड़ाही में चावल बनाकर के भगवान शिव के इन सभी गणों को भोजन कराओ अपने महाराज का आदेश सुनकर के सतयुग का आदमी चलता है और वहां आकर के देखा है की उसे कड़ाही का भार तो सो टन से ऊपर है। 

पर वह तो सतयुग के युग का व्यक्ति था वह बड़ा ही बलवान था उसने एक बहुत बड़ी भट्टी खोदने के बाद पेड़ों से लकड़ियां को तोड़ करके लाया और उसने अग्नि जाली अग्नि जलाने के बाद उस कड़ाही को एक हाथ से उठाया और उठा करके भट्टी पर रख दिया और चावल उठाया और कड़ाही में डाल दिया पानी भी डाल दिया और चावल बना दिया जब बहुत विशाल कड़ाही में चावल बन गए तो उस व्यक्ति ने जो सतयुग का था उसने समस्त गणों को बैठाया पत्तल दिया और चावलों से भोजन कर दिया अपना कार्य पूरा करके वापस अपने मलिक सत युग के पास आया और कहने लगा की, हे प्रभु में जा रहा हूं अब मेरा काम हो गया है, भगवान विष्णु और अन्य लोग यह सब देख रहे थे। 

फिर भगवान शिव त्रेता युग से कहते हैं की, हे त्रेता तुम अपने युग के व्यक्ति को भेजो और यह जो अभी तक सतयुग के आदमी ने जो किया था उसे में अपनी माया से पुनः पहले जैसा कर देता हूं । अब तुम अपने युग के व्यक्ति से इस चावल को बनवाओ और मेरे गणों को भोजन करवाओ तो त्रेता युग ने कहा की ठीक है प्रभु जैसी आपकी आज्ञा त्रेता युग ने भी अपना एक महान योद्धा कुंभकरण जैसा बलवान प्रकट किया और उसको आदेश दिया की जो तलहटी में नीचे हजारों टन का कड़ाही रखा हुआ है इसमें हजारों मन चावल रखा है उसे बनाना है, पकाना है और जब चावल पक करके तैयार हो जाए तो इन सभी गणों को खाना खिलाना है।

त्रेता युग का व्यक्ति भी बड़ा ही बलवान था। वह उस कड़ाही के पास आया पास में एक भट्टी खोदी और उस कड़ाही को दोनों हाथों से उठाकर के भट्ठी पर रख दिया और ऊपर रखने के बाद अग्नि जलादि और अग्नि जलाकर उसमें चावल डाला पानी डाला और चावल पक करके तैयार हो गए त्रेता युग के व्यक्ति ने जो भगवान शिव के गण थे उन सब को खाना खिलाया और भोजन करने के बाद सभी गण वापस कैलाश पर्वत पर आ गए भगवान शिव ने फिर अपनी शक्ति से उस भट्टी पर से कड़ाही को हटा दिया। 

अब भगवान शिव द्वापर युग से कहते हैं की द्वापर ये दोनों युग अपनी अपनी परीक्षा दे चुके हैं अब तुम्हारी बारी है देखिए इतना ही बड़ा कड़ाही उस तलहटी में दिखाई दे रहा है और हजारों मन चावल रखें हुए हैं और तुम्हें मेरे गणों को भोजन करना है द्वापर कहने लगा की ठीक है प्रभु आपकी जैसी इच्छा मैं पूरा पर्यटन करूंगा की मेरे युग का जो व्यक्ति है आपके सभी गणों को खाना खिला सकें वहां पर द्वापर युग ने भी एक भीम जैसे योद्धा जेसे बड़ा ही ताकतवर बलवान व्यक्ति को बना करके खड़ा कर दिया और उसे कहा की जाइए देखिए तलहटी में कड़ाही रखा हुआ है वहां रखें कड़ाही मैं उसे चावल को बनाना है और बनाकर इन सभी शिवगणों को भोजन करना है।

वह व्यक्ति कहता है की ठीक है प्रभु जैसी आपकी आजा द्वापर युग का व्यक्ति चला जाता है वह देखता है की कड़ाही आकर में बहुत बड़ा और वजनी है। उठाने में ताकत लगानी पड़ेगी उसने भट्टी खोदी और लकड़ियों की व्यवस्था की और उस कड़ाही को दोनों हाथों से उठाया क्योंकि उसे सतयुग और त्रेता युग के व्यक्ति आराम से उठा सकते थे लेकिन उसे बहुत ताकत लगानी पड़ी पुरी ताकत लगाकर उसने उस कड़ाही को उठाया और उठाकर के जैसे-तैसे खींचकर भट्टी पर रखा और नीचे अग्नि जलाई और उसमें चावल डाल दिए और जब चावल पक गए तो भगवान शिव के उन सभी गणों को भोजन कराया खाना खिलाने के बाद वह द्वापर युग का व्यक्ति अपने मलिक के पास आता है और कहता है की, हे प्रभु मैंने अपना काम कर दिया वहां पर द्वापर युग उससे बहुत खुश हुआ और कहा शाबाश अब तुम जा सकते हो। 
अब भगवान शिव कहते हैं की है कलयुग अब तुम्हारी बारी है।

जो कड़ाही तुम देख रहे हो उसका वजन कम नहीं होगा उसका वजन उतना ही रहेगा हजारों टन लेकिन अब तुम्हें परीक्षा देनी है। लेकिन पहले मानने को तैयार नहीं थे की तुम सबसे छोटे हो तुम्हारे आदमी की आयु भी मात्रा सो वर्ष है जबकि अन्य युगों के लोगों की आयु बहुत अधिक होती है
सतयुग के मनुष्य की आयु एक लाख वर्ष होती थी, त्रेता युग में दस हजार वर्ष होती थी और द्वापर युग में एक हजार वर्ष होती थी और एक कलयुग तुम्हारे शासन में मात्र सौ वर्ष और तुम्हारा आदमी भी छोटा है।

जब भगवान शिव की बातें कलयुग में सुनी तो कलयुग कहता है की प्रभु ठीक है मैं आपकी बात मानता हूं लेकिन पहले ही आप मुझे इस तरीके से हताश मत कीजिए प्रभु आप तो एक न्याय कर्ता हैं सबको मौका दिया जा रहा है हम भी परीक्षा देकर देखेंगे यदि हमसे नहीं हो पाया तब जाकर हम मानेंगे भगवान शिव कहते हैं ठीक है तुम अपना आदमी बुला लो फिर भगवान शिव कहते हैं की यह कड़ाही देख रहे हो हजारों टन का वजन है वहां चावल रखा है यह भी हजारों टन है। तुम्हारा व्यक्ति क्या करेगा? कलयुग कहता है की ठीक है प्रभु, आप मेरा तमाशा तो देखिए, ये सुनकर तीनों युग हंसने लगे😂😂😂।

भगवान शिव भी कलयुग की बात को सुनकर अचंभित थे भगवान शिव सोच रहे थे की क्या कलयुग का व्यक्ति इतने हजारों की वजनी कड़ाही को उठा पाएगा कलयुग ने बड़े ही बुद्धिमान व्यक्ति को पैदा किया बड़ा ही तीव्र व्यक्ति था बहुत ज्यादा सोचने वाला व्यक्ति था सर्व गुण संपन्न व्यक्ति को कलयुग ने पैदा किया और पैदा करके व्यक्ति से कहा की बेटे तुम्हें अपनी शक्ति दिखानी है परीक्षा का समय है यदि तुम इसमें असफल हो गए तो मैं सबसे छोटा हो जाऊंगा वह व्यक्ति अपने महाराज से कहता है की महाराज आप इस
एक कड़ाही की बात करते हैं ऐसे हजारों कड़ाही हमारे सामने हो तो भी परेशानी नहीं है जब उस व्यक्ति की बात को तीनों यूगों ने सुना तो वह हंसने लगे कहे रहे थे की छोटा सा व्यक्ति जिसकी लंबाई छः फीट है यह क्या करेगा जबकि हमारे युगों के मनुष्यों की लंबाई तो बहुत ज्यादा हुआ करती थी यह बात बिल्कुल सच है सतयुग के लोगों की लंबाई 42 फीट और त्रेता युग के व्यक्ति की लंबाई 34 फीट और द्वापर युग के व्यक्ति की लंबाई 26 फीट थी और कलयुग के व्यक्ति की लंबाई मात्र 6 फीट होती है।
 
कलयुग कहता है की आप बस देखते रहिए मैंने लड़के को भेज दिया है कलयुग का आदेश प्रकार के वह कलयुग का तीव्र बुद्धि वाला व्यक्ति उस तलहटी में आया तलहटी में आकर उसने देखा की कड़ाही का वजन तो बड़ा ही विशाल है मैं इसे उठा नहीं पाऊंगा तो उस व्यक्ति ने दिमाग लगाया उसने कड़ाही के नीचे से ही मिट्टी खोदना शुरू कर दिया कड़ाही को उसने हिलाया भी नहीं और उसके नीचे भट्टी खोदकर तैयार कर दी लकड़ियों की व्यवस्था करने में उसे थोड़ा सा भी समय नहीं लगा क्योंकि लकड़ियां वहां पर पहले से ही रखी हुई थी उसने उन लकड़ियो को उठा लिया और उसे भट्ठी में आज जला दी कड़ाही में चावल डाला पानी डाला और बस कुछ ही समय में चावल पक कर के तैयार हो
गए।

वह कलयुग का व्यक्ति कितना दिमाग वाला था उसने कुछ भी नहीं किया कड़ाही के नीचे भट्ठी खोदी और उसमें आग जला दी और चावल को डाल दिया और चावल में पानी डाला और चावल पक भी गया जब चावल पक गए तो भगवान शिवके  गणों को एक कतार में बैठा दिया उन गणों से कहा की आप मेरा साथ दें और आप इस चावल को आपस में परोस दीजिए भगवान शिव के चार विशाल गण चलते हैं और उन चावलों को बाल्टियों में भर भर के सभी गणों को परोस दिया तब कलयुग कहता है की अब आप सब भोजन कर सकते हैं भगवान शिव के सभी गण खुशी खुशी भोजन करते हैं कलयुग के मनुष्य ने उन चार शेष बच्चे गणों को भी भोजन कराया भोजन करने के बाद उस कड़ाही को साफ किया और कड़ाही वहीं छोड़ दिया और उसका काम पूरा हो गया वो अपने महाराज कलयुग के पास आया और आकर के कलयुग से कहा की, हे प्रभु मैंने आपका काम कर दिया है। कलयुग बहुत खुश था कहने लगा शाबाश आपने मेरी लाज रख ली आपने मेरी परीक्षा पास कर ली भगवान शिव और तीनों युग देख कर अचंभित रह गए।

भगवान शिव अब आप निर्णय कीजिए की हम में से बड़ा कौन है भगवान शिव मन में विचार करने लगे और सोच कर के जवाब दिया भगवान शिव कहते हैं की मैंने तुम चारों की परीक्षा ली जब सतयुग का व्यक्ति आया तो उसने अपनी ताकत लगाई और ताकत लगाकर कड़ाही को उठाकर के अग्नि पे रख दिया और स्वयं ने ही मेरे सभी गणों को चावल परोसा जब त्रेता युग की बारी आई तो उस व्यक्ति ने भी बिल्कुल ऐसा ही किया कड़ाही को उठाया भट्ठी पर रखा उसमें चावल डाला पानी डाला और उसे पकाया और सबको खिलाया और इसी तरीके से द्वापर युग के व्यक्ति ने भी किया।

परंतु आपने देखा की 6 फीट का व्यक्ति इसकी बुद्धि देखिए कितना विशाल कड़ाही था शायद उससे हिल भी नहीं सकता था फिर भी उसने उसे कड़ाही मैं चावल बना लिया मेरे इतने गण थे की अगर वह बाल्टियों से परोसता तो वो शायद परेशान हो जाता तो देखिए उसने उनमें से ही चार गण अपनी सहायता के लिए बुलाए और चारों गणों से भोजन परोसवाया और स्वयं बैठा रहा यह तो बड़ा बुद्धिमान व्यक्ति हुआ यह तो बड़ा ही बुद्धिमान युग हुआ भगवान शिव कहते हैं की कलयुग बड़ा ही बुद्धिमान व्यक्तियों का युग होगा इसमें मशीनों का आविष्कार होगा बड़े-बड़े दिमाग धारी इंसान होंगे।

भगवान शिव कहते हैं की तुम सब युग जैसा शासन करते आए हो ठीक है माना तुम्हारे युगों में मनुष्य धार्मिक हो लेकिन तुम्हारे युग के व्यक्तियों में बुद्धि का अभाव था उन्होंने कभी अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं किया नहीं तो कुंभकरण रावण इनके जैसे महान योद्धा जिनको लड़ने के लिए स्वयं भगवान अवतार ले लेकर आए और वे इतना मूर्ख थे यह नहीं जान सके की यह भगवान है। यह सृष्टि के रचनाकार हैं, और उनसे युद्ध किया और सभी के सभी मारे गए कलयुग के व्यक्ति को देखो अब वो कितना बुद्धिमान है और आगे आने वाले युगों में आगे आने वाले कलयुग के राज में वैसे ही बुद्धिमान व्यक्ति देखने को मिलेंगे तो भगवान शिव ने फैसला किया की तुम चारों युगों में सबसे बड़ा कलयुग होगा कलयुग मशीनों का युग होगा कली का अर्थ है “मशीन” और युग का अर्थ हैं “समय” अर्थात कलयुग मशीनों का समय होगा इस समय बड़ी-बड़ी मशीनों का आविष्कार होगा जो की सतयुग, त्रेता युग और द्वापर युग में नहीं हो पाएगा, भगवान शिव की बातें सुनकर वह चारों युग भगवान शिव की बात मान लेते हैं। और कलियुग को सबसे महान युग घोषित कर दिया जाता है। फिर चारों युग अपने-अपने धामों की और अपने अपने राज्यों को लोट प्रस्थान करते हैं।

इस प्रकार भगवान भोलेनाथ ने चारों युगों का फैसला किया।


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आखिर में दोस्तों उम्मीद करता हूं जानकारी आपको यह पौराणिक कथा जरूर पसंद आई होगी अगर कथा पसंद आई हो तो दोस्तों कमेंट बॉक्स में “जय महाकाल” “हर हर महादेव” जरूर लिखे।
तो दोस्तो मिलते हैं आपसे अगली एक नई कथा के साथ तब तक आप सभी को मेरा राम-राम जी 🙏🏻🙏🏻🙏🏻


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